गोरी नाचेला मनवा हमार (लोकगीत)
उमड़ि–घुमड़ि बरसेला कारी बदरिया, पुरवा चलेली बयार
नाचेला मनवा हमार– गोरी नाचेला मनवा हमार।
झम–झम बरसेला बदरा जइसे, गोरी तोरे पाँव कै पायल
बिजुरी जइसे दो नैना करले मोर जियरवा घायल –
डोलि–डोलि जाला हिया हे गोरी जब–जब उड़ेला अँचरा तोहार–
गोरी नाचेला मनवा हमार।
अइसन लागेला हमका झूमत ई गेहुँवन कै बाली
ठाढ़ी हो जइसे लाज की मारी दुलहिन बनिके आली
फूलि–फुलि आला जिया देखि–देखि हरियर धरती कै रुपवा सिंगार।
गोरी नाचेला मनवा हमार।
लह–लह लहकेला मनवा लखि–लखि ई फसलन कै क्यारी
अटरू–मटरू खातिर लइबै अबकी गाय दुधारी
काहे रूठि जाला गोरी, अबके गढ़ाइ देब तोहके सोनवा हार।
गोरी नाचेला मनवा हमार।
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